दूर सही पर चाँद नज़र तो आया है……

तू मेरी दुआओं का सरमाया है ,
आरजु-ओ-मिन्नत से तुझे पाया है ,

तेरा शुक्र मैं कैसे अदा करूँ मौला ,
तुने मेरे ख्वाब को हकीकत बनाया है ,

बयाँ नहीं कर सकता कितनी खुशी है ,
दूर सही पर चाँद नज़र तो आया है ,

मेरी नज़रों से दूर कभी रहा ही नहीं ,
मैंने अपनी आँखों में तुझे बसाया है ,

मैं अपने होशो हवास में नहीं “शादाब” ,
उसने आज मुझे मिलने को बुलाया है !!

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