हमारा रिश्ता तो जज़्बात से है……..

शिकवा तो अपने हालात से है ,
तू क्यूँ जुदा मेरी ज़ात से है ,

तू चाहता है मुझको ये काफी है ,
क्या लेना मुझे आब-ए-हयात से है ,

सिर्फ लफ़्ज़ों के सहारे नहीं कहानी ,
हमारा रिश्ता तो जज़्बात से है ,

दूरियों का गम नहीं है मुझे ,
उम्मीद तो तेरी मुलाकात से है ,

कोई शै नहीं जो हमें जुदा कर दे ,
डर है तो बस अपनी वफात से है ,

मेरे एहबाब भी कम नहीं “शादाब” ,
माना के दुश्मनी सारे कायनात से है !!

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