मौत बख्श दो मेरी जान ले लो !!

मुजरीम-ए-इश्क हूँ मेरा इम्तिहान ले लो ,
गम मुझे देकर मेरी खुशियाँ तमाम ले लो ,

बहुत परवाज़ कर चुका खुले आसमान में ,
तुम मेरे पंख क़तर दो मेरी उड़ान ले लो ,

दिल करता है बेचैन रहूँ मैं भी तेरी तरह ,
सुकून-ए-दिल छीन कर मेरा इत्मीनान ले लो ,

चंद लम्हों का मेहमान हूँ तुझसे जुदा होकर ,
एहसान करो मौत बख्श दो मेरी जान ले लो !!

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