मैं जिन्दा हूँ तुझे ये खबर तो है……

मेंरी दुआओं में कुछ असर तो है ,
मैं जिन्दा हूँ तुझे ये खबर तो है ,

हकीकत की ज़मीन न मिली तो क्या ,
मेरे पास ख़्वाबों का शज़र तो है ,

दीद की खुशी में तेरा पता भूल गया ,
हाँ मगर सामने तेरा शहर तो है ,

हज़ारों गम हो मौजूद इस दिल में सही ,
मिलने की खुशी में एक लहर तो है ,

हाल न पुछ मेरा कुछ सवाल न कर ,
यही काफी है तू मेरा चारागर तो है ,

कितना भी पोंछ ले अश्कों को अपने तू ,
आँख खुश्क हो मगर दामन तर तो है ,

रिश्ता खून का मिटता नहीं मिटाने से भी ,
औलाद दूर सही लख्त-ए-जिगर तो है ,

आंधीयों से कह दो मेरे करीब न आयें ,
चराग कमज़ोर पर अज्मों का लश्कर तो है ,

मैं मुस्कुराता हूँ मगर ये सोचता भी हूँ ,
दिल में चुभा तेरी याद का खंज़र तो है ,

वो सामने नहीं “शादाब” ये सच है मगर ,
उस वस्ल का मेरी आँखों में मंज़र तो है !!

Leave a Reply