महकता गुलाब होना चाहता हूँ……..

तेरी तदबीर तेरा ख्वाब होना चाहता हूँ ,
तेरे रुख पर फैला हिजाब होना चाहता हूँ ,

जमाने ने ठुकराया है तो कोई बात नहीं ,
तेरे नज़रों का इन्तेखाब होना चाहता हूँ ,

तेरी तकदीर से जुदा न कर पाए कोई भी ,
मैं तेरे लिए दस्तयाब होना चाहता हूँ ,

जुल्फों में सजा ले जो तू उम्र भर के लिए ,
मैं वो महकता गुलाब होना चाहता हूँ ,

तन्हाई में जो तुने किये हैं खामोश सवाल ,
मैं उस हर एक का जवाब होना चाहता हूँ ,

जिसे तू पढ़ सके अपनी बंद आँखों से भी ,
मैं वोह खुली किताब होना चाहता हूँ !!

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