कोई मिलता नही आईना दिखाने वाला……

कोई रास्ता नही मन्जिल पे जाने वाला ,
कोई बचा नही हाथ छूड़ाने वाला ,

मै अपनी सूरत देखु भी तो कैसे ,
कोई मिलता नही आईना दिखाने वाला ,

कहता है राज-ए-दिल बताते क्यु नही ,
सुनो कोई राज नही अब छूपाने वाला ,

तुम गए हो जबसे तन्हा हु मै ,
कोई सागर भी नही दिल बहलाने वाला ,

भटकता हु दिन रात तेरे शहर मे ,
कोई मिलता नही तेरा पता बताने वाला ,

हथेली को देखने से क्या हासिल “शादाब” ,
ईस पे कोई लकीर भी नही मिटाने वाला !!

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