तंत्र-मंत्र-यंत्र

सब मनाते हैं गणतंत्र

कहां बचा है जनतंत्र

कहां ओझल है लोकतंत्र

यह तो लगता है भीङतंत्र

फैला भ्रष्टाचारी तंत्र

चहुंदिश अत्याचारी मंत्र

रचता पाकिस्तान षङयंत्र

करता तैयार परमाणु यंत्र

छोङना होगा शान्ति का मूलमंत्र

करना होगा बुलन्द रण-तंत्र

क्यों छोङा स्वदेशी मंत्र

क्यों अपना लिया पाश्चात्य तंत्र

क्यों हो गये फैशन के परतंत्र

क्यों भूले तुम गांधी-मंत्र

उखाङ फैंको विदेशी कुतंत्र

अपना लो स्वदेशी सुमंत्र

तब होगा अपना गणतंत्र

तब होंगे हम स्वतंत्र

-“गोपी”

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