उस से बिछड़ा हूँ तो ये ख्याल होता है……..

उस से बिछड़ा हूँ तो ये ख्याल होता है ,
रु ब रु न होने का भी मलाल होता है ,

जिसने आंच न सही हो वो क्या जाने ,
ग़म-ए-आफ़ताब पे कितना जवाल होता है ,

मुद्दत हुई मय्यत को दफन किये हुए पर ,
इश्क़ मर भी जाए तो बेमिसाल होता है ,

शिकारी शाद न हो जाल में परिन्दे को देखके ,
भूख जब बर्दाश्त न हो ते ये हाल होता है ,

माहताब दिखता तो ऐसे भी खुबसूरत है पर ,
पानी में उसका अक्स बा जमाल होता है ,

मैं लिख तो दूँ ग़ज़ल तुझ पर भी शादाब ,
मगर शब्-ओ-रोज़ कहाँ ऐसा कमाल होता है !!

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