काश तू शीशा-ए-आईना बना ले मुझको……..

तू ईस तरह अपने पहलु में छुपा ले मुझको ,
मैं सितारा बन जाऊं ज़ुल्फ़ में सजा ले मुझको ,

तेरी ही सूरत को मैं देखा करूँ दिन रात सनम ,
काश तू शीशा-ए-आईना बना ले मुझको ,

तुझे ईस जमाने की नज़र ना लग जाए कहीं ,
मैं काज़ल बनू तू आँखों में लगा ले मुझको ,

तू अब जुदा होने की बात न किया कर कभी ,
गर हो सके तो अपने ज़ेहन से हटा ले मुझको ,

तुझसे दूर रह कर बड़ी तकलीफ में हूँ मैं ,
दो पल ही सही अपने पहलु में बिठा ले मुझको,

माँगता तो हूँ खुदा से दुआओं में तुझको ही ,
तू अपने हाथ की लकीरों में बसा ले मुझको !!

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