सितम ये है के खाने के लिए निवाला नहीं मिलता……..

दर्द बयाँ कैसे करूँ मैं, सुनने वाला नहीं मिलता ,
रुठ तो जाऊं मैं मगर मनाने वाला नहीं मिलता ,

दश्त-ए-मुफलिसी में बर्तन तो मिल जाते हैं मगर ,
सितम ये है के खाने के लिए निवाला नहीं मिलता !!

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