अनजाना स डर !!

एक मुलाकात से डरता हूँ..

दिल की हर बात से डरता हूँ..

हर एक जज्बात से डरता हूँ..

आँखों की गुस्ताखी से डरता हूँ..

सपनो की बैचैनी से डरता हूँ..

चाहतों की बेबसी और लम्हों की बेरुखी से डरता हूँ..

पलकों पे ख्वाब सजाने से डरता हूँ..

उसकी बाहों में सिमट जाने से डरता हूँ..

उन निगाहों की कशिश से डरता हूँ..

अपने धरकनो की तपिश से डरता हूँ..

उन सुर्ख आँखों की गहराई से डरता हूँ..

उन मासूम नजरों की तन्हाई से डरता हूँ..

उनके आने के आभास से डरता हूँ..

उनके चले जाने के एहसास से डरता हूँ..

फिर भी,,

एक मुलाकात से डरता हूँ..

दिल की हर बात से डरता हूँ..

हर एक जज्बात से डरता हूँ..

 

 

Leave a Reply