मेरी कहानी

ये किस डगर चल पड़ा था जिसमे,
मुसाफिर भी मैं ही और हमसफ़र भी मैं ही था !!

ये कैसी बिमारी थी जिसमे,
चीख भरी ख़ामोशी भी मेरी थी और इलाज भी मैं ही था !!

ये कैसी घटा छाई थी जिसमे,
भींगा भी मैं ही और बारिश भी मैं ही था !!
ये कैसी कुदरती थी जिसमे,
सजा भी मैंने पायी और साजिश भी मैं ही था !!

ये कैसा तूफ़ान आया था जिसमे,
चोट भी मैंने खायी और साहिल भी मैं ही था !!

ये मेरी कहानी थी जिसमे,
क़त्ल भी मेरा हुआ और कातिल भी मैं ही था !!!

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