हम अपने आंसू के कतरों का भी हिसाब रखते हैं……..

चेहरे पे नकाब और आईने की तलाश रखते हैं ,
अजीब हैं अहले समंदर लबों पे प्यास रखते हैं ,

सितम की इन्तेहा है तुझे मालूम नहीं गम मेरा ,
हम अपने आंसू के कतरों का भी हिसाब रखते हैं ,

कभी तो होगा ख़तम मेरा ये गुमनाम सा सफ़र ,
आस पास के लोग मेरे एसे कयास रखते हैं ,

शब् भर नुमाइंदा रहती है जैसे तारों की खामोशी ,
तारों के साथ हम खुद को भी उदास रखते हैं ,

वादी-ए-दिल तो सभी देखना चाहते हैं शादाब ,
हम हैं जो दिल सदा गम का लिबास रखते हैं !!

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