फ़रियाद

आज सुदूर चल पड़ा है मन मेरा.
जैसे सपनो में मिल गया हो एक नया बसेरा.
जैसे दूर कहीं नज़र आया हो एक खुबसूरत सवेरा.
जैसे छंटने वाला हो ये घना अँधेरा ..

किसी के अल्फाजो ने कल्पना
को नयी उड़ान दे दी.
कब से अंधेरो में भटक रहा था
आज उसने रौशनी की पहचान दे दी ..

अब एक ही फ़रियाद करता हूँ रब से
की फिर से ये आँखें ना नम हो जाये.
और नज़र से नज़र मिलने से पहले
मेरे वक़्त की नब्ज ना थम जाये..

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