शायद, हम तुम्हे भूल भी पाए

प्यार इतना न करो के दिल मेरा मचल जाए
रास्त में छोड़ दो शायद, हम तुम्हे भूल भी पाए

मुलाक़ात में रखो कुछ दुरिया , धड़कने ऐसे भी तेज है
दूर से ही देखो कभी शायद, दिल का दौरा भी सह पाए.

सिने में है जलन, आग भी बहोत तेज है
कदर इतनी न करो, के जलके भस्म हो जाए

प्यार है, इस निगाहबान को, तुम्हारी हर चाल पे नाज़ है
झिझक है बस इतनी, निगाह बदल आप चल ना जाए

 

जनक देसाइ

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  1. Yashwant Mathur 19/09/2012

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