बेलुत्फ़ जिंदगी

बेलुत्फ़ हो गई अब, यह जिंदगी पीते पीते
अब कैसे जी पाऊंगा मैं शराब के बगैर

शायद मेरे नशीब तेरी दोस्ती का जाम होता
गुजर जाती यह जिंदगी, बस यूं ही पीते पीते…………..जनक म देसाई

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