मैं शिव, तू काजल है शिव…

मैं क़लम, तू कागज़ है शिव ,
मैं शिव, तू काजल है शिव…

सृष्टि में है हर-हर, कण-कण में है शिव ,

अत्र,तत्र ,सर्वत्र, जन-जन में है शिव ..

पर्वत, हरयाली, हर रंग में है शिव ,
अफीन,गांजा,  हर भंग में है शिव..  
हवा,पानी और आग में है शिव ,
जंगल के सर्पीले नाग में है शिव..
मन में मेरे, तेरा डेरा है शिव ,
मैं तेरी काशी, तू मेरा है शिव..
तू मेरी चाहत, तेरी जुदाई क्यूँ सहूँ मैं शिव,
बुलाले अपने पास , तुझ बिन क्यूँ रहूँ मैं शिव…
मैं शिव-रात्रि, तू भोर है शिव, 
तेरी कसम, तू मेरे चारो ओर है शिव..    
                  kajal sky….

2 Comments

  1. pankaj kumar sah pankaj kumar sah 13/09/2012

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