मौन शब्द

वर्षों से तुमने कोशिश की

हमें गूंगा बनाने की

चाहते रहे मौन हो जाए हमारे शब्द

डूब जाए हमारी आवाज ,हमारी पहचान

राहत के नाम पर

हम हो जाएँ बेजुवान

वर्षों से तर्जनी दिखलाकर

हमें करते रहे निर्देशित

अपने पन्नों पर हमारे लिए

लिखा तुमने –दलित,शोषित |

वर्षों से तुमने की हमारे शब्दों पर आपत्ति

हमने कहा प्यार तुमने समझी गाली

हमने गाए गीत तुम्हें बुरा लगा

हमने लिखी कविता तुमने विद्रोही कहा

तुम्हारे भारी-भरकम शब्दों के भार तले

हम दबते रहे,सिसकते रहे

सुलगने की हमारी नाकाम कोशिश पर

तुमने हमें हिंशक समझा |

हमने ही बोला था जिन्दावाद तुम्हारे लिए

हमने हो ढोए थे झंडे तुम्हारे लिए

हम्हीं गाते रहे हैं कोरस गीत तुम्हारे लिए

हमारे ही दम पर अब तक

तुम पहुँचते रहे हो सत्ता तक |

वहाँ जाते ही तुम्हारा रंग बदल गया

तुम्हारी भाषा बदल गयी

तुम्हारे शब्द धारदार हो गए

कुर्ता चकचक सफेद और मन काला हो गया

तुम लुटते रहे और पूरा देश दिवाला हो गया |

तुमने पूरी व्यवस्था को भ्रष्ट कर रखा है

सबको त्रस्त कर रखा है

घोटाले खतरों के निशान से उपर बह रहे हैं

महँगाई का तूफ़ान किसी से कम नहीं है

तुम्हारी वजह से हमारी अंतड़ी में दम नहीं है

हमारे पैरों में खम नहीं है

हम लडखडा रहे हैं

पर याद रख हम गिरे नहीं हैं

अभी हम मरे नहीं हैं |

जान लो ! मर कर भी हम अमर रहेंगे

मौन होकर भी हमारे शब्द मुखर रहेंगे

मौन को मुखरित करना हम जानते हैं

सियासी चाल को हम खूब पहचानते हैं

सत्य का है साथ ,जब लक्ष्य भी है ज्ञात

चल पड़े हम अब कुछ तूफानी करते हैं |

Leave a Reply