हिन्दी का सम्मान

हिन्दी का असली रूप पहचानो
हिन्दी को अपना मानो ;
हिन्दी ने ही षब्दो का अर्थ बतया
अपनो को अपना कहना सिखाया ।
मातृभाशा का यह रूप है अनुपम
बोलने – लिखने मे है सरल सुगम ।।
संस्कृत से उद्गम हुआ
व्याकरण का संगम हुआ ,
रिष्तो को बांधती है शब्दो की डोर से
अकंन नही है कम किसी भी छोर से ।।
हिन्दी ने ही करायी षास्त्रो पहचान
सबहे पहले किया धर्मो का बखान
हिन्दी स्वच्छ निर्मल होती है
इसकी वाणी सरल होती है
एक रूप् को अनेक बनाए
मां को माता जननि कहाए
इसके सरगम मे मीठी झंकार
अलंकारो का यह करती श्रंगार ।।
यह नही है किसी से कम ,
ब्चपन का पहला गीत
मां की लोरी का संगीत
पांच तत्वो का कीमत
हिन्दी से ही जुड़े है सभी मन के प्रीत ।।

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  1. अरुण अग्रवाल अरुण जी अग्रवाल 29/10/2014

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