आज का ईश्वर

आज का ईश्वर

हे ईश्वर,  हम सब तेरे ही रूप,
इस जग में कहीं छाँव है,  कहीं धूप,
हमारा भी थोडा,  उद्धार कर दो,
नैयाँ हमारी,  उस पार कर दो |

हे ईश्वर …….. रूप |

बैठें हैं हम, एक आस लेकर,
तू देगा दर्शन, हमें पास आकर,
गरीबों की विनती , कभी सुन तो लेना,
तेरे दार तक न, हो जिनका पहुंचना |

 हे ईश्वर …….. रूप |

पत्थर की मूरत बन, मंदिरों में बंद है ,
अमीरों की सूरत , देखने को रजामंद है,
मंदिरों से निकलकर, खुली हवा में जो आओगे,
दुःख- दर्द दीन दुखियों के, तब जान पाओगे,

हे ईश्वर …….. रूप |

2 Comments

  1. Jayanthi R 14/09/2012

Leave a Reply