चंदना

चंदा की चांदनी में चन्दन की खुशबू लिए ‘चंदना’

चंचल शोर करती हुयी, चेनाब नदी किनारे चित्त मोह रही ‘चंदना’ ..…

सारे चमन में भी ‘चंदना’ सी कोई चंपा -कली नहीं
चित -चोर कहूँ या घन -घोर कहूँ , ‘चंदना’ सी कोई मनमोहिनी मोर नहीं …..
चंचल , मन -भावन, शोख हसीना उसे जानो
‘चंदना’ की आंखें बस कोई नगीना है मानो….

जब हो ‘चंदना’ के माधुर्य की बरसात
जाग उठता है मानो उस पल सारा ही कायनात …..
चमकते हैं जब ‘चंदना’ के जुगनू जैसे नयन
दिल कहता है लिखूं उस पर लाखो प्रेम -गायन …..

चंचल शोख हवाओं में ‘चंदना’ की अल्ल्हड़ प्रीति का आभास
मन को लुभा रही है ‘चंदना’ की मासूम, शरारती, भोली अहसास …
चिरनुतन, चिरपावन और चिरस्थायी है ‘चंदना’ की मुस्कान
सच पूछो तो मन करता है बस करूँ उसका ही गुणगान …

वो दुलारी, मुझे लगती प्यारी ‘चंदना’ की हर बात
मनमीत है, संगीत है, वो तो है एक अनूठा सौगात…..
हिरनों सी चाल उसमें, बोले तो वीणा सी तान उसमें
चंचला चपला ‘चंदना’ वो, अदाएं की जैसे दामिनी उसमें…..

संदली, कंचनी, कामिनी वो, ‘चंदना’ की उजियाली
वो अमावस की दिवाली, देखूं तो है मन की हरयाली…..
महफिलों की जान, ‘चंदना’ है मेरी आशा और मेरा अरमान
खुश हूँ पाकर उसका साथ, करता हूँ उसका हार्दिक मान-सम्मान…..

काली घटाओं में चंचल बिजली सी कौंधती वो
फूलों की क्यारियों में रंगीली तितली सी खेलती वो……
इठलाती, बलखाती वो युवती, ‘चंदना’ है गुल-ए-गुलज़ार
उसकी प्रीती से सराबोर, मैं गाता चला हूँ राग-मल्ल्हार……

‘चंदना’ अक्सर मेरे सपनो में आये
दिल के मेरे साज़ो को वो गुद्गुदाये, छेड़ जाये…..
मैं करूँ जब ‘चंदना’ से अटखेलियाँ
डर और सहम के वो बोले ‘देख रही हैं मेरी सारी सहेलियाँ’…..

‘चंदना’ मेरे ख्वाबों की रानी, वो बनी दिल की राजधानी का अभिन्न अंग
प्रेरित किया है उसने मुझे लिखने को मेरे जीवन का पहला गीत-प्रसंग …..
इत्र और इश्क का अजीब मिश्रण, वो है कोई अनोखा राज़
‘चंदना’ को भेंट देने मैं बनाऊंगा एक अद्भुत ताज़ ……

Ramjee Chaudhary (Research Scholar @ IIT Bombay)

 

 

One Response

  1. bhishma patel 13/09/2012

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