एक प्यास कुछ ऐसी लगी मुझे

पानी तो रोज पीता हुँ मैँ…
पर आज एक प्यास कुछ ऐसी लगी मुझे,
की उसने पानी को मेरे नाम कर दिया.
.
.
सपने तो रोज देखता हुँ मैँ…
पर आज एक सपना कुछ ऐसा देखा मैँने,
की उसने जिँदगी को मेरे हवाले कर दिया.
.
.
उठता तो रोज हुँ मैँ…
पर आज कुछ ऐसे उठा मैँ,
की उसने कडा आत्मविश्वास मुझमे भर दिया.
.
.
सूरत तो रोज देखता हुँ आईने मे…
पर आज एक सुरत कुछ ऐसी देखी मैँने,
की उसने सुंदरता का प्रतीक मुझको बना दिया.
.
.
दिल तो रोज धडकता है मेरा…
पर आज एक धडकन कुछ ऐसी धडकी,
की उसने मेरी सांसो को अमर कर दिया.
.
.
चलता तो रोज हुँ मैं…
पर आज कुछ ऐसे चला मै,
की कदमो ने मंजिल को पिछे छोड दिया.
.
-वैभव

Leave a Reply