तुम्हारी यादें । (गीत)

तुम्हारी यादें । (गीत)

हँसाती है, हमें रूलाती है, कहते हैं सब उसे यादें..!
(कोरस- तुम्हारी यादें..बस यादें!)

आती हैं, याद आती हैं, सपनों में आ के जो सताती है..!
(कोरस- तुम्हारी बातें..!)
बस यादें..तेरी बातें..!(२)

अंतरा-१.

निर्मल है, बड़ा कोमल है, सब के दिलों का दिली याराना ।
गुल है, गुलशन भी है, यारी की लगन सही नज़राना ।

हँसाती है, हमें रूलाती है, कहते हैं सब उसे यादें..!
(कोरस- तुम्हारी यादें..!)
बस यादें..तेरी बातें..!(२)

(दिली= घनिष्ठ; लगन= दिलचस्पी )

अंतरा-२.

मस्ती भी, वहाँ बसती है, ख़ुद से दबंग जहाँ दोस्ती ।
रूठती, फिर मनाती है, दिल में कहीं ना ख़ुदपरस्ती ।

हँसाती है, हमें रूलाती है, कहते हैं सब उसे यादें..!
(कोरस- तुम्हारी यादें..!)
बस यादें..तेरी बातें..!(२)

(दबंग= प्रभावशाली; ख़ुदपरस्ती= स्वार्थीपन)

अंतरा-३.

पाना है, कभी न खोना है, दिल का वही ठिकाना है ।
जाना है, पहचाना है, यारों का यही तो अफ़साना है ।

हँसाती है, हमें रूलाती है, कहते हैं सब उसे यादें..!
(कोरस- तुम्हारी यादें..!)
बस यादें..तेरी बातें..!(२)

आती हैं, याद आती हैं, सपनों में आ के जो सताती है..!
(कोरस- तुम्हारी बातें..!)
बस यादें..तेरी बातें..!(२)

(अफ़साना= किस्सा-कहानी)

मार्कण्ड दवे । दिनांकः०६-०९-२०१२.

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