हिन्दी दिवस

14 सितम्बर कुछ तो याद आया, आएगा क्यों नही भई इसे तो हम हिंदी दिवस के रूप मे मनाते हैं। वैसे तो आजकल हमने हर बात का कोई डे मनाने की परंपरा चालू कर दी है जैसे- “मदर्स डे’, “फादर्स डे’, “वेलेंटाइन डे’ आदि ये सभी दिवस हम बड़े धूम-धाम से मनाते हैं जी हाँ आप सही समझ रहे हैं। पूर्ण समर्पण की भावना के साथ सिर्फ एक दिन अपना प्यार लुटाते हैं। इन सभी के प्रति, वरना सब समझेगें कि हमें अपने माता-पिता अपने दोस्तों से प्यार नही है।

बिल्कुल वैसे ही जैसे हम स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस मनाते हैं। सच्चे देश भक्त होने का प्रमाण देते हैं। अरे! भाई कैसे? बताते हैं नेता भाषण देकर, झंडा फहराकर राष्ट्रगान गाकर और क्या, मिल गया प्रमाण यही तो है सच्ची देश भक्ति।

हाँ तो हम 14 सितम्बर के बारे में बात कर रहे थे। हमारी राष्ट्र भाषा हिन्दी जिसे हम 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाते हैं। हाँ बस इस दिन हम  हिन्दी को प्रथम पायदान (नम्बर वन) बताते हैं। बाकी बचे हुए दिनों में हिन्दी बोलने में शर्माते हैं। वैसे तो सरकार इस ओर काफी प्रगतिशीलता दिखा रही है दफ्तरों में ज्यादातर काम यहाँ तक कि हस्ताक्षर भी हिन्दी में करवा रही है। पर क्या करें सरकार भी बेचारी मजबूर है। अंग्रेजों ने भारत छोड़ दिया पर अपनी भाषा यहीं छो़ड़ गए।

हमारे देश के बुद्धिजीवियों ने इसे अपनी बेटी बना लिया, नाजों से पाला, बड़ा किया। तभी तो आज हर तरफ अंग्रेजी का बोल बाला है। आप माने या ना मानें हमारी सभ्यता संस्कृति हममें कूट-कूट कर भरी है। हम हिंदुस्तानी हैं। इस पर हमें गर्व है। हमारी परंपरा रही है घर आए अतिथि का आदर सत्कार करना, अंग्रेजी हमारी अपनी नही पर फिर भी अब अपनों से बढ़कर है।

जरा सोचिए जब हम पराए को अपना बना सकते हैं तो अपनों को अपनाने मे कैसी शर्म, हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है हमारी अपनी भाषा इस पर तो हमें गर्व होना चाहिए। जहाँ जाए अपनी राष्ट्र भाषा का प्रयोग करें इसे बोलने में शर्मिंदगी महसूस ना करें। बल्कि गौरवान्वित अनुभव करें। हिन्दी का प्रयोग कर अपने देश, अपनी भाषा के प्रति लगाव की भावना को प्रदर्शित करना चाहिए ना कि केवल एक दिन याद करके दिखावा मात्र।

4 Comments

  1. Yashwant Mathur 10/09/2012
  2. virendra sharma 10/09/2012
  3. Kavita Rawat 10/09/2012

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