इन हवाओं में घुली है

इन हवाओं में घुली  है  दास्तानें  प्यार की

हो नहीं सकती अलग ख़ुशबू हमारे प्यार की

 

हम  नहीं  बदले,  मौसम कई आए-गए

महकना सबके लिए, हैं फितरतें प्यार की

 

कीमत वफ़ादारी की  हमने चुकाई बहुत

त्याग और बलिदान, हैं रौनकें प्यार की 

 

दंभ  कोरी बातों का,  हम नहीं  भरते

हर आजमाइस में, खरे उतरे प्यार की

 

अपनी नफ़रतें कहीं  और लेकर जाइये

हमने तो पढ़ी  है, किताबें  प्यार की 

4 Comments

  1. Yashwant Mathur 10/09/2012
    • नादिर अहमद नादिर 10/09/2012
  2. Digamber 11/09/2012
    • नादिर अहमद नादिर 11/09/2012

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