जली हुई तक़दीर

आज फिर

माँ के हाथों जल गई एक रोटी,

खीझ उठी माँ

जली हुई रोटी को तवे से पटकते हुए बोली-

इतनी सावधानी के बावजूद

आज फिर जल गई रोटी

मेरी तक़दीर की तरह…

आज फिर खाने पर

मेरे पिता का बरबराना निश्चित है,

आज फिर

गुस्से का सामना करना होगा

जली हुयी रोटी को

जैसे मेरी माँ करती है

मेरे पिता का सामना,

तब कोई

असमानता नहीं रह जाती

उस जली हुयी रोटी और

मेरी माँ के

तक़दीर में…….|

3 Comments

  1. onkarkedia.blogspot.com 15/09/2012
  2. आशा जोगळेकर 15/09/2012
    • pankaj kumar sah pankaj kumar sah 18/09/2012

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