तय है

शख्त दीवार  ही सही  गिरना तय है
वक्त मुश्किल ही सही बदलना तय है

 

हम रुके हैं कहाँ  रोके से  किसी के
है फ़ूल  तो खुशबू का महकना तय है

 

हम तलाश  ही लेंगे ज़मीं अपने  लिए
हज़ार ठोकरों के बाद संभलना तय है

 

तुम न समझो किसी को अपने आगे
 जड़ों का तूफाँ में हिलना तय है

 

नादिर जिंदगी का हिसाब भी रखना
इन साँसों का एक-दिन रुकना तय है

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