काश, हम भी मोबाईल होते..! (गीत)

जलते हैं भीतर, काश हम भी मोबाईल होते..!

उनके करीब रह कर हम, कितने वर्सटाईल होते?

(versatile=वर्सटाईल= हरफ़न मौला,सर्वगुणसंपन्न)

अंतरा-१.

जब वो, प्यार से अपलक देखते, दिल के स्क्रीन को..!

ओ..ह, इस अदा पर हम, जहान से भी हॉस्टईल होते..!

जलते हैं भीतर, काश हम भी मोबाईल होते..!

(अपलक देखना= ताकना; Hostile= हॉस्टाईल = आक्रामक,दुश्मन )

अंतरा-२.

उनके निपट पास जाकर हम, गालों को सहलाते..!

ज़ुल्फ़ों की ख़ुशबू से खेल, फिर गुडी-गुडाई फिल होते ।

जलते हैं भीतर, काश हम भी मोबाईल होते..!

(निपट= पूरी तरह से; नाज़= गर्व)
(Goody-Gooday feel= गुडी-गुडाई फिल = मधुर अपनापन का
अहसास)

अंतरा-३.

दिनभर नर्म हाथों पर और रात उनके सिरहनों पर ।

पास रखती तो, अपुन के भी नवाबी ईस्टाईल होते..!

जलते हैं भीतर, काश हम भी मोबाईल होते..!

( style=ईस्टाईल= ढंग, तरीक़ा; सिरहन= तकिये के पास)

अंतरा-४.

दिल का सिम जवान रहता, प्यार का पावर ऑन रहता ।

दुःख है मगर, काश कि हम, इश्क के आईन्स्टाईन होते..!

जलते हैं भीतर, काश हम भी मोबाईल होते..!

(दिल का सिम= SIM CARD; आईन्स्टाईन= निष्णात संशोधक)

मार्कण्ड दवे । दिनांकः ०१-०९-२०१२.

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