दिवाना दिल गीत।

दिवाना दिल फिर, मुकम्मल जगह ढूंढता है ।

तुझे भूलाने की, ठोस वजह ढूंढता है ।

 

अहदे-वफ़ा का तुक, कभी न जाना तुने फिर भी..!

मिज़ाज – ए – इश्क पाया किस तरह, ढूंढता है..!

दिवाना दिल फिर, मुकम्मल जगह ढूंढता है ।

 

निगाँहे करम के किस्से, सुने जहाँ ने शौक़ से ।

ज़माना रहरह कर अब , नुक्स बेवजह ढूंढता है

दिवाना दिल फिर, मुकम्मल जगह ढूंढता है ।

 

बे-रहमतों का सबब अभी तक, ना बताया तुने..!

यहाँ, ये दिल बावरा बेसबब, फ़तह ढूंढता है ।

दिवाना दिल फिर, मुकम्मल जगह ढूंढता है ।

 

महरूम रह जायेगा दिल, अवन – गुल की सेज से..!

सुकूने दिल शायद, नोकीली सतह ढूंढता है ?

दिवाना दिल फिर, मुकम्मल जगह ढूंढता है ।

 

(मुकम्मल= परिपूर्ण, जिसमें कोई कमी न हो)

(जगह= आसरा; ठोस= मज़बूत)

(अहदे-वफ़ा= वफ़ादारी का वादा; तुक= मतलब)

(मिज़ाज-ए-इश्क= प्यार का अहसास; किसतरह= कैसे )

(निगाँहे करम=प्यार; नुक़्स= ग़लती)

(महरूम= वंचित; अवन-गुल की सेज = प्यार के फूलों से सजी शय्या)

(सुकूने दिल= दिल का आराम; नोकीली= चुभती)

(बेरहमत=निर्दयता; सबब= कारण)

 

…………………………………………..मार्कण्ड दवे । दिनांकः ३१-०८-२०१२.

 

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