जख्म

आवादी के दलदल में /धंसे पैर लेकर

उबरने की कोशिश में

और धंसता जा रहा है /आहत देश |

ह्रदय की कन्दराओं में /स्निग्ध प्यार की जगह

घुटन ,कुंठा और अभावों का /जख्म लिए

रेंग रहा है हर कोई /बदल गया है आदमी का वेष |

रंगीन सपनों के गुब्बारे /भरने से पहले ही फूट जाते हैं

कमसिन बालाएँ मिट्टी के घरौंदे बना

गुडिया की ब्याह रचाती है /और उसका दुल्हा राजा

सच्चाई बनकर आ जाता है उसके सामने

ख्वाबों के ताजमहल का यह भयानक परिवेश |

विवाह की नयी परिभाषा /कम बच्चे और दहेज ज्यादा

फिर टूटन और तलाक

पुन: नये सूत्रधार की तलाश

विभाजन की क्रिया में बच्चे शेष |

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