देश की अखंडता

भीषण हिंसा की आग, जल रहा कोक्राझार।

समती न आज आग, देखिए असम की।।

त्राहि माम त्राहि माम, मचा पूरे देश शोर।

देखो दबी राख कैसे, चिनगारी भडकी।।

देश की अखंडता न,जिनको सुहाती आज।

बने हैं पलीता सब, वही इस आग की।।

देश की अखंडता को, यूँ न कर तार तार ।

सुधि कर प्यारे जरा , माँ के उपकार की।।

                         –      सत्यनारायण सिंह