“क” / निष्कर्ष

मिले जो किस्मत और कर्म
तो “क” से बनी कठिनाई |
हिली जो रोजमर्रा की पगडंडी,
तब वीधाता कि याद आई |

बस एक एहसास था
शायद मन शांत था|

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