इक बार आके मेरा गाँव देखिए !

इक बार आके मेरा गाँव देखिए !
कितने बदल गये है लोग, उनका स्वभाव देखिए ।।

माँ कि तरह भाभियाँ भी, जहाँ करती थी इन्तजार ।
बदला हुआ है उनका भी, प्यार रंग रुप आकार।।
बडे भाई थे राम जहा पे ,आज वही पर रावण है।
हर घर हो इक रण कि भूमि, यह उनका पहला प्रण है।।
भाई भाई का हर घर मेँ ,आज जरा टकराव देखिए  ।

कितने बदल गये है लोग……..इक बार आके मेरा गाँव…….

सुबह शाम जहर को पीना, हर इन्साँ की ख्वाब रहती है  ।
जहाँ बहती थी अमृत कि गंगा, आज वही शराब बहती हैँ ।।
माँ-बाप भाई-बहन सबको , पराया बना देती ।
दौलत दुनिया हर हस्ती, पल भर मेँ यह मिटा देती ।।
 नफरत से भरी हर रिश्तो का , आज जरा लगाव देखिए ।

कितने बदल गये है लोग……..इक बार आके मेरा गाँव…….

बाप वृध्दो कि जहा होती थी,  हरदम सेवा ।
उन घरो मे खुशियोँ कि दिन रात, बरसती थी मेवा।।
शैतानो का अब बना है डेरा ,क्योँकि ऐसा कर्म नही है।
दर-दर कि ठोकर खाके रोते है, फिर भी उनको शर्म नही है ।।

बच्चोँ का माँ बाप प्रति ,आइये तो बदलाव देखिए।

कितने बदल गये है लोग……..इक बार आके मेरा गाँव…….

सुख दुःख मेँ हरदम साथ जो दे , कोई नही है मित्र भी ऐसा।
स्वार्थ के सब भूखे है, जब तक पास रहेगा पैसा।।                                                                                                                                                                                       किसको हम क्या-क्या बतलाये, खुद तुम आकर जान लो ।
हर शक्ल पे है नकाब, हटाकर तुम पहचान लो।।
दिल पर दिया इन्सानोँ का, आज जरा हर घाव देखिए 

कितने बदल गये है लोग……..इक बार आके मेरा गाँव…….

इक बार आके मेरा गाँव देखिए !
कितने बदल गये है लोग, उनका स्वभाव देखिए ।।

2 Comments

  1. moolaram kachhawaha 03/02/2013
  2. Ravi prakash verma 18/04/2013

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