सर्वप्रथम उन वीरोँ को

जिन्होने अपनी मातृभूमि कि, स्वतन्त्रता मेँ किया है काम ।
सर्वप्रथम उन वीरोँ को, दिल से मै करता हूँ प्रणाम ॥

आओ उनको याद करे हम, जिन्होने लुटा दी अपनी जान ।
तिरंगा को न झुकने देना, यही है वीरोँ कि पहचान ॥

गुलामी कि जंजीरोँ से, जो बँधकर भी नही हुए गुलाम ।

सर्वप्रथम उन वीरोँ को, दिल से मै करता हूँ प्रणाम ॥

श्मशानो पर ढ़ेर लगे थे, शहीद हुए सभी वीरोँ से ।

मातृभूमि भी तडप उठी थी,गुलामी कि जंजीरोँ से ॥

जिन वीरोँ का इतिहासोँ मेँ,  अमर रहेगा सदैव नाम ।

सर्वप्रथम उन वीरोँ को, दिल से मै करता हूँ प्रणाम ॥

प्राणो की आहुति दे देकर, इस देश की रक्षा करनी है ।
इक क्षण भी आँच न आने पाये, यह मुल्क हमारी जननी है ॥

स्वाधीनता पाने को, जो क्षणभर भी नही किये आराम ॥
सर्वप्रथम उन वीरोँ को, दिल से मै करता हूँ प्रणाम ॥

खून पसीनो से सिँचा है ,अधखिले पुष्प मुस्काए है ।
लाखो वीरोँ के बलि चढे है, तब आजादी पाए है ॥

जिन वीरोँ ने मीठे स्वर मेँ, दिया हमे यह पैगाम ।

सर्वप्रथम उन वीरोँ को, दिल से मै करता हूँ प्रणाम ॥

जिन्होने अपनी मातृभूमि कि, स्वतन्त्रता मेँ किया है काम ।
सर्वप्रथम उन वीरोँ को दिल से, मै करता हूँ प्रणाम ॥

 

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