नेत्रदान

      नेत्रदान 

 

जिंदगी के लम्हें हैं कम,
हर लम्हों में जी लो जीवन,
मौत कभी भी है अनजान,
अमर रहना है,   तो कर दो नेत्रदान |

संसार में चाहे,  न किया हो किसी का भला,
जीवन भर कहते रहे,  तुम्हारा तुम देखो – मैं चला,
जाने से पहले,  किसी को दे दो जीवनदान,
अमर रहना है,   तो कर दो नेत्रदान |

तुम्हारी आँखों से,  वह देखेगा ख़ुशी से,
साकार करेगा ,  अपने सपनों को मर्जी से,
उसकी दुआओं को, मरने से पहले कर लो ग्रहण,
अमर रहना है,   तो कर दो नेत्रदान |

 

सौ सुनंदा कुंभार 

2 Comments

  1. pradeep mishra 02/12/2012

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