समुंदर

समुंदर में मैं हूं

मुझ में समुंदर !

बारिश की बूँदें समुंदर में

और समुंदर बारिश की बूँदों में

मुझे करीब से देखो

पहचानो !

उभरती डूबती लहरों को देखो

सुनो !

वह क्या कह रही हैं ?

यह रह रह कर कौन उभरता है

डूबता है ??

लहर लहर समुंदर

लहरें साहिल से टकराती हैं

फैलती हैं

अपने होने का एहसास दिलाती हैं ,

फिर लौट जाती हैं .`~~

ज़मीन की गर्दिश

सूरज की तपिश

जिंदगी का बेदार होना

और पानी का भाप बन जाना

मेरी कोख से निकलने वाली आवाज़ को किस ने सुना

किस ने जाना ?

आसमां की कसम जो मेंह बरसाता है

और ज़मीन की कसम जो फट जाती है

तुम्हें क्या मालूम , मैं क्या हूं ?

मेरी तहों में क्या है ??

बस एक घोंघा तुम्हारे हाथ लग गया

रेत के कुछ जर्रों का इल्म हो गया

और उस से आगे

और उस से परे

…..

….

कसम है आसमानों की

और चमकते हुये तारों की

अगर मुझे जानना चाहते हो तो खुद एक समुंदर बन जाओ

फैल जाओ मेरी लहरों की तरह

फैल जाओ मेरी लहरों की तरह

रात के तीसरे पहर , आती  हुई सदाओं की तरह

सूरज की सतरंगी किरणों की तरह .

 

समुंदर की उभरती डूबती फैलती

सूनामी लहरें सदायें दे रही हैं .

समुंदर में मैं हूं

मुझ में समुंदर …!

 

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