दिल की दरार

दिल की दरार । (गीत)

दिल की दरार से, दर्द का लावा बह रहा है ।

दोस्त, राख बन कर अब वो, पछतावा कर रहा है ।

(लावा=ज्वालामुखी पदार्थ)

अंतरा-१.

इश्क से परहेज़ करने के पल आ गए, शायद..!

किनारा करते हैं हम से वो, भुलावा कह रहा है ।

दिल की दरार से, दर्द का लावा बह रहा है ।

(परहेज़= एहतियात; भुलावा= चकमा देना)

अंतरा- २.

अरमाँ भरा चमन खिला तो था, गुलों के लिए, पर..!

महफ़िल सजाएगें अब कांटें, बुलावा कह रहा है ।

दिल की दरार से, दर्द का लावा बह रहा है ।

(गुल= फूल; बुलावा= निमंत्रण)

अंतरा-३.

मुस्कुराहटों में तेरी, ये दिल भी तहत था, मगर..!

दिल की दरार से देख अंदर, छलावा हँस रहा है ।

दिल की दरार से, दर्द का लावा बह रहा है ।

(तहत= शामिल होना; छलावा= धोखेबाज़ी)

अंतरा-४.

जाए तो जाए कहाँ, बेकस, टूटा – फूटा सा दिल..!

शायद, मयक़दे की ओर, ये कारवाँ चल रहा है?

दिल की दरार से, दर्द का लावा बह रहा है ।

(बेकस= लावारिस)

————————————  मार्कण्ड दवे ।

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