विनाश की आहट

सुन्दर नैसर्गिक झलकियाँ
हवा,फिजा और बादियाँ
पर्वत,झरने, और नदियाँ
पेड़, पौधे, और बगियाँ
जंगल, मैदान,और भुमियां
सागर, बन्दर,और डगरियाँ
गांव, नगर, और बस्तियां
सृष्टी, प्रकृति,और बदरियाँ
बदलते-मौसम,सर्दी, और गर्मियाँ
यह खतरे, प्रदुसन,और मजबूरियां
इन्सान समझ जाये तो शुक्रियां
ना समझे तो आ रहीं विनिष्टियाँ

सजन कुमार मुरारका

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