भगवान बनाम इंसान

इंसानों के भगवान
दिखते हैं उनकी कल्पनायों से
जीते हैं उनकी श्रद्धा-बिश्वास से
इंसानों के भगवान
सर्वांग -पावन-प्रवीण सुन्दर से
जनम-मरण-रहित सन्तुष्ट से
इंसानों के भगवान
बिवेचक-पालनहार-पुण्यात्मा से
दासानुदास भाव, तुष्ट गुणगान से
इंसानों के भगवान
भगवान की हर रचना इंसानों से
तभी तो-“भगवान” बने इंसानों से
परन्तु…………………!!
भगवान के इन्सान
दिखते है जीते-जागते पर मृत से
जीते-जिन्दगी रंजिश,भेद-भाव से
भगवान के इन्सान
सर्वांग-बनावटी-रूप मे, कुरूप से
मरण मजबूर, जन्मे भी असन्तुष्ट से
भगवान के इन्सान
अबिवेचक,स्वार्थ अपार,कपट- आत्मा से
ऊँचे-अहम् भाव, तुष्ट झूटे गुणगान से
भगवान के इन्सान
इंसानों की हर रचना भगवान से
तभी तो-“इन्सान” बने भगवान से
पर हमें जानना है :——–
इन्सान का है भगवान ?
भगवान का है इन्सान ?……..
जब की……
भगवान बनाये हर इन्सान को
बताये पुण्य की राह “उनहे” पाने को
और…?
इन्सान बन खुद आये धरा पे
अपना सच दिखाये इंसानों से

सजन कुमार मुरारका

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