“पीकर डगमगाना

“पीकर डगमगाना जरूरी था जीने के लिए,
अब डगमगाता रहता पीने के लिए”.
इसलिए पीने की आदत बुरी जीने के लिए
डगमगाओ मत,ना जरूरी मय जीने के लिए
जिन्दगी ही सुख है, पीना है जीने के लिए ….!
आपके छंद सरिता पीकर मन डगमगाया, पर था सम्हलना
कुछ बताने, या समझने-बिन पीये जाने कैसे होता है डगमगाना
“पी लिया करते हैं जीने की तमन्ना में कभी कभी
डगमगाना भी जरूरी है, सम्हलने के लिए कभी कभी

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