हुस्न

हुस्न से बढकर नशे का न कोई मयखाना,
उड़ गए होश, पर चाहत का नहीं भरा पैमाना
होश-में हुवे मदहोश पर नशे से भरा नहीं मन
तेरे मीठे होटों को पीने को करूँ कितना जतन
टूटे हुवे प्यालों में हाला,पीने को बेबस आता मधुशाला
तेरी जुल्फें,गालों की लाली,होटों का मधुमय प्याला
पीया था कई…कई बार,हुआ नहीं पीने का नशा कम,
जो अब हिस्सा है जीने का पर प्यास अभी हुई कंहा ख़तम
कितनी बार दिल को सहलाया, यांदों के जाम अब आंसुओं से भरे
अभी भी कुछ शेस नहीं, समय की धारा मे जीयें तेरे हुस्न के सहारे

Leave a Reply