सपनो के संसार में

तन्हा  है  दुनिया  की  भीड़  में  हम,

ना  ठिकाना, हैं  मंजिल  की  तलाश  में  गुम,

मिलेगा  कभी  तो  खोया  संसार,

अभी  भी   नींद  से  नहीं  जागे   है  हम. ..

था हमारा जो  सहारा

कर  गया  वो  ही  बेसहारा,

परछाई  भी  जब  साथ  ना  दे,

किस्मत  ने  मुझे  ऐसा है   मारा,

किस्मत  के  धागे  में  बंधे  बेबस हम,

अभी  भी   नींद  से  नहीं  जागे   है  हम. ..

ठोकरों  में  डाल  रेत  का  वो   घर,

सपनो  की  ऊंची  उडान  का  वो  घर,

जी  लेंगे  सपनो  के  साथ  आज  भी,

खा  कर  ठोकरे  दर  बदर,

किये  अपनी    आँखों  को  को  थोडा  सा  नम

अभी  भी   नींद  से  नहीं  जागे   है  हम. ..

सच   होगा  ख्वाब  कभी  तो  मेरा ,

आएगा  खोया  हुआ  सपना  सुनहरा,

यूँ तो  रुसवा  नहीं  कर  सकता  वो  मुझे

प्यार  तो  उसने  भी  खोया  है  मेरा ,

मैंने  थोडा  ज्यादा  उसने  थोडा   कम,

अभी  भी   नींद  से  नहीं  जागे   है  हम. ..

7 Comments

  1. Shruti Kalra 16/08/2012
  2. Shruti Kalra 16/08/2012
  3. Anita Bhattacharya 16/08/2012
  4. Sunil Kumar 16/08/2012

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