सर जी

तुमने सोचा तो बहुत था

हमें बेड़ियों में बाँध

अपने इशारों पर नचाओगे

चाबुक दिखाकर डराओगे

 तुम आगे चलोगे

हम तुम्हारे पीछे

कटोरा लेकर दौड़ेंगे

जब तुम्हारा जी चाहेगा

तुम अपनी जूठन से

कुछ टुकड़े

हमें डाल दोगे

और हम

ख़ुश होकर

तुम्हारा गुणगान करेंगे

तुम्हारी जयकार करेंगे

 दुनिया को अपने इशारे पर

नचाने का ख़्वाब लिए

तुम जब दहाड़ोगे

हम दुबक जायेंगे

जान की दुहाई मांगेंगे

तुम हँसोगे

हम काँप जायेंगे

तुम बटन दबाओगे

हम गायब हो जायेंगे

तुम जाम छलकाओगे

हम तुम्हारा मन बहलाएंगे

 तुमने सोंचा तो बहुत था

पर ऐसा हो न सका

इस बात का मलाल तो बहुत होगा

सर जी !

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