मेरी कविता बोली …..

एक दिन

मैं कविता लिखने बैठा

की अचानक कहीं से

कविता आ धमकी, बोली-

क्या कर रहे हो..?

मैंने कहा

तुम्हारी रचना कर रहा हूँ

तुम्हे नया रूप दे रहा हूँ

सुनाऊँ क्या ?

बोली- चल हट !

तेरी तो कोई सुनता ही नहीं

तुम्हे तो कोई गुणता ही नहीं

फिर

मैं क्यों सुनूँ

मैं क्यों गुणु

यूँ ही जमीन पर पड़ा रह

सर झुकाए खड़ा रह…

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