छू हो गई

बढ़ती उम्र थी, जवानी छू हो गई

खुशबू सूखे गुलाब की छू हो गई

 

 अब होश में आए तो क्या आए

जब रोशनी चिरागों की छू हो गई

 

 पूछता फिरता रहा वो ठिकाना मेरा

अजी कटी पतंग थी, छू हो गई

 

 हो गया दिमाग हावी मुझ पर

अब बातें दिल की छू हो गई 

 

 ता उम्र सजाया सँवारा जिसको

मौत लेकर ज़िंदगी छू हो गई

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