मैं दिखता हूँ जो आँखों में तो लब से क्यूँ नहीं कहते

मैं दिखता हूँ जो आँखों में तो लब से क्यूँ नहीं कहते

मुझे कहते हो तुम अपना तो सब से क्यूँ नहीं कहते

लब-ए-खामोश से ही बस दलील-ए-इश्क देते हो

जो लेना है दुआओं से तो रब से क्यूँ नहीं कहते

– संजीव आर्या

2 Comments

  1. Yashodadigvijay4 27/07/2012
  2. CB Singh 28/07/2012

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