दूर जितना वो मुझसे जाएंगें

गजल !

दूर जितना ही मुझसे जाएंगे !
मुझको उतना क़रीब पाएँगे !!

कुछ न होगा तो आंख नम होगी!
दोस्त बिछड़े जो याद आएंगे !!

फिर्र से खुशिओं के अब्र छाएंगे !
डूबते तारे झिलमिलाएंगे !!

माना पतझड में हम हुए वीरां !
अब की सावन में संवर जाएँगे !

तेरी आंखों मे वो समन्दर है !
तेरी आंखों मे डूब जाएगें !!

इक ग़ज़ल तेरे नाम की लिखकर!
सुबह ता शाम गुनगुनाएँगे !!
 
गुल नसीबों के मुस्कुराएंगे !
ऍसे लमहे जरूर आंएंगे !!

जिनके हांथों में दोनो आलम है!
उनके दर पर सुकून पाएंगे !!
                       शायर सलीम रज़ा

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