इशारा है आशिकी का

आँखों में मुहब्बत की कहानी ,
दिल में लहरें उम्मीद की ,
धडकनों में चाहत की रवानी
याद तो हर साँस में आनी
शुरुआत और अन्त प्रेम का
बिरह और मिलन सन्देश का
छंद रचे संदर अति भाबुक सा……
जो दिल के अन्दर कस्तुरी-मृग सा
बेगानापन है खोज का
जैसे भटके मन पागल सा
मरूभूमी में जल मरिचीका सा
रगों में बहता सिहरन सा
तड़पन जगाये मिलन का
जागे रातोंमे, नींद कंहा आनी
छबि घुमे नयनों में प्रियतम की
दिन सुना-सुना, रात भी बेगानी
खुले नयनों में स्वप्नों सा
भ्रमित मन चाँद चकौर सा
खोजे चांदनी, आंगन तारों का
यह ही तो इशारा है आशिकी का

Leave a Reply