सावन बरसे नयनों में

बरसात के दिनों में
छाये बादल अम्बर में
रिमझिम बरसे पानी में
धरती शीतल शिहरण में
मिलन के आलिंगन में
महक गई फिजा में
प्रियतमा को जलाने में
दूर परदेशी प्रिया में
जागे प्यार मन में
चुभन भरे बिरह में
जागी कल्पना कवी में
“मेघ” को दूत बनाने में
रचे भाव कविता में
“मेघदूत” के छंदों में
तढ़पन लगी प्रीतम में
नयन बरसे सावन में
शीतल झरते नीर में
अगन लगी सजनी में
शिहरण जागी मन में
विरह झलके नयन में
बिजली जैसे नभ में
सावन बरसे नयनों में

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