अफसोश

बेतुकी-निरश चिंताओं का प्रभाव
जिंदगी से आँख-मिचौली, न लगाव
अब टीस रहें है यादों के पुराने घाव
मेरे गम पर आँशु तो बहाव
रिश्तों मैं भी मिला अनादर का भाव
शियार से लोंगों मैं चतुराई का अभाव
हर एक को बिस्वाश करने का स्वभाव
हारी हर बाज़ी, अब हो सिर्फ पछताव
मेरे गम पर आँशु तो बहाव

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